की मोहम्मद से वफ़ा तू ने तो हम तेरे हैं
एक दीन, एक नबी, एक कुरआन, एक उम्मत !

- कुरआन हमें जोड़ता है,
- सीरत हमें एक बनाती है।
- तो फिर हम बिखरे क्यों रहें?
- आइए सीरत के साए तले एक उम्मत बनकर समाज के लिए फ़ायदेमंद बनें।
- इस कॉन्फ्रेंस में शरीक होकर इत्तेहाद-ए-उम्मत का सबूत दें।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद-मबई
29 नवम्बर 2025 बरोज शनिचर.
बाद नमाज-ए-मग़रिब से रात 10 बजे तक N.H एन.एच. स्कूल ग्राउंड, नाया नगर मीरा रोड
खवातीन के लिए पर्दे का इंतजाम होगा।







